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प्रिय 2018,
सादर नमन।
वैसे नमन करने की इच्छा तो बिल्कुल नही है किन्तु भारत से संस्कार अभी पूरी तरह विलुप्त नहीं हुए हैं अतएव नमन स्वीकार करें। ये पाती तो प्रेम की लिखनी है लेकिन आप लोगों ने धरती पर प्रेम , विश्वास जैसा कुछ नहीं छोड़ा इसलिए थोड़ी नफरत भरी पाती लिख रहा हूँ।
वैसे छोटा मुँह और बड़ी बात है फिर भी कह रहा हूँ कि आपकी पीढ़ी दुनिया की सबसे स्वार्थी पीढ़ी होगी जिसने केवल खुद के बारे में ही सोचा, कभी यह नहीं सोचा कि आगे आने वाली पीढ़ियों को विरासत में क्या मिलेगा। आपने जल को बर्बाद कर दिया, वायु प्रदूषण इतना बढ़ा दिया कि साँस लेना भी मुश्किल हो गया है, हम बिना ऑक्सीजन मास्क के बाहर नहीं निकल सकते। जनसंख्या इतनी बढ़ गई है कि हमारे लिए बनाए गए खेल के मैदान भी पार्किंग में तब्दील हो गए हैं। जंगल नष्ट हो चुके हैं और नए वृक्ष लगाने की जगह ही नहीं बची है।
काश आप लोगों ने हम लोगों के बारे मे जरा भी सोचा होता तो हम भी गर्मी की छुट्टियों में नानी के घर जाते, पेडों से आम तोड़ते, नदियों में नहाते पर अब तो सालभर सिर्फ गर्मी ही रहती है, छुट्टियां a.c. में बीतती हैं इसी वजह से हम लोगों मे रोगप्रतिरोधक क्षमता भी अत्यंत कम है जिसका दुष्परिणाम हमें अपने प्राण तक देकर चुकाना पड़ता है।
हाँ! लेकिन मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ कि हमारे आगे आने वाली पीढियां हमसे इतनी दुखी कभी नहीं होंगी।
चरण स्पर्श (अनिच्छा से)
आपका पराया
2050
डॉ. आशु जैन 27/12/18