Sunday, January 6, 2019

मजदूर


उसके जीवन में पल भर विश्राम नहीं
मजबूर है वो मजदूरी उसका काम नहीं
चैन सुकून से कट जाए वह शाम नहीं
क्यों? धनिकों सा वह भी धनवान नहीं।
जीवन उसका साधारण कोई शान नहीं
मदद करे वो सबकी पर अभिमान नहीं
अपनी अच्छाई का उसको मान नहीं
क्यों? धनिकों सा वह भी धनवान नहीं।
 *रोज* मजूरी करे तभी वो खा पाए
कभी कभी तो भूखे पेट ही सो जाए
उसको मिला कुबेर से कोई वरदान नहीं
क्यों? धनिकों सा वह भी धनवान नहीं।
उसके साथ तो पल पल ही लाचारी है
दुख सहकर भी हँसके उम्र गुजारी है
है जरूरतमंद मगर बेईमान नहीं
क्यों? धनिकों सा वह भी धनवान नहीं।
डॉ. आशु जैन 28/12/18

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