Sunday, January 6, 2019

साईं से मुलाकात

साईं से भेंट: यात्रा वृत्तांत
बात लगभग दस वर्ष पुरानी है, मैं और मेरी एक सहेली बैंक की परीक्षा देकर भोपाल से जबलपुर आने के लिए ट्रेन का इंतजार कर रहे थे। रिज़र्वेशन था इसलिये चिंता की कोई बात नहीं थी। ट्रेन प्लेटफार्म क्रमांक 4 पर आने वाली थी लेकिन पता नही क्यों हम दोनों क्रमांक 1 पर इंतजार कर रहे थे। पेपर तो 5 बजे खत्म हो गया था और ट्रेन 11 बजे की थी तो हमने प्लेटफार्म पर ही समय बिताना उचित समझा लेकिन समझने में गलती के कारण हम 4 की बजाय 1 पर इंतजार करते रहे। बातों में मशगूल थे तो और भी निश्चिंतता से केवल इंतज़ार कर रहे थे। जब 11 बज गए और ट्रेन नही आई तो मैंने अपने पास खड़े एक रेल कर्मचारी से पूछा कि ट्रेन क्यों नहीं आई तो उसने इशारा करके बताया कि वो तो खड़ी है आपके सामने 4 नम्बर पे।
सुनकर हमदोनों की हालत खराब हो गई क्योंकि ट्रेन का हॉर्न बज चुका था और 1 से 4 पर पहुचना बिल्कुल भी आसान नहीं था।
फिर भी चाहे जो हो जाये जाना तो है ही ऐसा सोचकर हम दोनों ने दौड़ लगा दी। मेरे मन मे उस दिन पता नहीं क्यों लगातार साईं का नाम चल रहा था , हम बस लगातार दौड़ रहे थे कि ट्रेन चल पड़ी अब समझ ही नहीं आ रहा था क्या करें फिर पता चला कि हबीबगंज में थोड़ी देर ट्रैन रुकती है हम दोनों ने एक ऑटो किया और उसको अपनी परेशानी बताई , उस ऑटो वाले ने ऐसा ऑटो चलाया कि यदि गलती से कोई दुर्घटना हो जाती तो हममें से कोई नहीं बचता फिर भी भगवान की कृपा से हम हबीबगंज पहुँच गए।
वहाँ पता चलता है कि ट्रेन छूटने का समय हो गया है फिर दौड़ लगाई मै हिम्मत हार रही थी कि पता नहीं कहां से एक अंकल आये और बोले वो सामने ट्रैन है बैठ जाओ हम जैसे ही ट्रेन में चढ़े हॉर्न बजा और ट्रेन चल पड़ी तभी एक दूसरे अंकल कहते हैं कि इतने सालों से इस ट्रेन में सफर कर रहा हूँ ये 2 मिनट से ज्यादा हबीबगंज में नही रुकती आज इतनी देर तक रुकी है आप लोगो के लिए। मैंने पहले वाले अंकल को खिड़की से ढूंढने की और उन्हें धन्यवाद देने की कोशिश की लेकिन वहां कोई नही था। मुझे लगा कि शायद साईं मेरे मन से निकलकर प्रत्यक्ष आकर मार्गदर्शन कर गए।
मैं एक खिलाड़ी रह चुकी हूँ मैंने 10 वर्ष बास्केटबॉल खेला है ढेरों यात्राएं की हैं लेकिन ये यात्रा मुझे भुलाये नहीं भूलती।

डॉ. आशु जैन 13/12/18

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