Sunday, January 6, 2019

सर्दी


प्यार तेरा इस सर्दी सा
पाकर जिसको मैं ठिठुर गई,
बातें भी शीतलहर सी हैं
जिनको सुनकर मैं सिहर गई।
गुस्सा तेरा जीरो डिग्री
जिसे देख के बर्फ सी जम गई
आँखें तेरी कोहरे जैसी
जिनमें खुद को पा सहम गई।
सर्द हवाओं सी साँसे
मुझको कपकपा जाती हैं
मुझे देख के तेरी घबराहट
कुछ जकड़न सी दे जाती है
ये सर्दी का मौसम जानम
हर बार यूँ ही तड़पाता है
तू सीमा पर रह जाता है
और पारा गिरता जाता है।
डॉ. आशु जैन 04/01/2019

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