हम
जुदा हुए
तकदीर का खेल
तुमने सोचा
कभी?
वो
था फरेब
प्यार नही था
मैने समझा
अब।
तुमने
हर बार
बहलाया झूठ से
मानती रही
मैं।
अब
ठान लिया
लडूंगी अकेले सब से
रहूँगी साथ
अपने।
डॉ. आशु जैन 30/04/19
जुदा हुए
तकदीर का खेल
तुमने सोचा
कभी?
वो
था फरेब
प्यार नही था
मैने समझा
अब।
तुमने
हर बार
बहलाया झूठ से
मानती रही
मैं।
अब
ठान लिया
लडूंगी अकेले सब से
रहूँगी साथ
अपने।
डॉ. आशु जैन 30/04/19
No comments:
Post a Comment