Sunday, January 6, 2019

सुनो

नया:
क्यों तुमको अब पहले सा प्यार नहीं

क्यों चाँद में अब मेरा दीदार नहीं

क्यों दो नैना मिलकर होते चार नही

सुनो ! तुम्हारा नयापन मुझे स्वीकार नहीं।

क्यों मेरे बिन दिन और रात बेकार नहीं

क्यों मेरे संग भी आता तुम्हे करार नहीं

क्यों आँखे अब करती दिल पर वार नहीं

सुनो ! तुम्हारा नयापन मुझे स्वीकार नहीं।

क्यों मुझपर पहले सा वो एतबार नहीं

क्यों मेरे रंग रूप का वो सत्कार नहीं

क्यों मेरी बातों का चढ़े खुमार नहीं

सुनो ! तुम्हारा नयापन मुझे स्वीकार नहीं।
डॉ. आशु जैन 31/12/18

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