लब:
कभी लबों पे मुस्कान की वजह मिल जाये
कुछ ऐसा हो कि मुझसे तू बेवजह मिल जाये।
कभी न रात आये न कभी कोई शाम ही ठहरे
कि तेरे मिलने पे एक ऐसी सुबह मिल जाये।
जिसमें तू ही तू हो बस तेरा ही ज़िक्र फैला हो
बातों और जज़्बातों की कोई ज़िरह मिल जाये।
कि अब हम थक चुके हैं दम नही है और लड़ने का
बिना अल्फाजों की अब कोई सुलह मिल जाये।
न जिसमे हार हो मेरी न जिसमे हार हो तेरी
हम दोनों खुश हो लें ऐसी फतह मिल जाये।
डॉ. आशु जैन 17/12/18
कभी लबों पे मुस्कान की वजह मिल जाये
कुछ ऐसा हो कि मुझसे तू बेवजह मिल जाये।
कभी न रात आये न कभी कोई शाम ही ठहरे
कि तेरे मिलने पे एक ऐसी सुबह मिल जाये।
जिसमें तू ही तू हो बस तेरा ही ज़िक्र फैला हो
बातों और जज़्बातों की कोई ज़िरह मिल जाये।
कि अब हम थक चुके हैं दम नही है और लड़ने का
बिना अल्फाजों की अब कोई सुलह मिल जाये।
न जिसमे हार हो मेरी न जिसमे हार हो तेरी
हम दोनों खुश हो लें ऐसी फतह मिल जाये।
डॉ. आशु जैन 17/12/18
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