ओस की नन्ही सी बूँद
देती है बहुत बड़ा संदेश
न हो कोई भेदभाव
न रखो किसी से क्लेश।
मिटना तो हम सबको है
फिर गर्मी किस बात की
मेरी तरह शीतल रहो और
करो प्रकृति का समावेश।
जी भर कर करो खुद से प्रेम
जैसे मैं करती हूँ
अपने दो पल के जीवन में भी
इंद्रधनुषी रंग भरती हूँ।
तुम भी धरो खुद में
जोश उमंग और उत्साह का भेष
ओस की नन्ही सी बूँद
देती है बहुत बड़ा सन्देश।
डॉ. आशु जैन 26/12/18
देती है बहुत बड़ा संदेश
न हो कोई भेदभाव
न रखो किसी से क्लेश।
मिटना तो हम सबको है
फिर गर्मी किस बात की
मेरी तरह शीतल रहो और
करो प्रकृति का समावेश।
जी भर कर करो खुद से प्रेम
जैसे मैं करती हूँ
अपने दो पल के जीवन में भी
इंद्रधनुषी रंग भरती हूँ।
तुम भी धरो खुद में
जोश उमंग और उत्साह का भेष
ओस की नन्ही सी बूँद
देती है बहुत बड़ा सन्देश।
डॉ. आशु जैन 26/12/18
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