Sunday, January 6, 2019

ताना-बाना

ताना-बाना:
कल तक बुन रही थी सपनों का ताना-बाना
आज से ही शुरू नया सफर हो गया
कल तक मेरे हर सपने में तू था
आज से तू मेरा हमसफ़र हो गया।
तू मिला है मुझे मेरी खुशनसीबी है,
मुझ पर मेहरबान मुकद्दर हो गया
सपने हकीकत बने, खिल गई हूँ मैं,
ऐसा मुझ पर तेरा असर हो गया।
तेरी आदतें कब मेरी बन गईं पता न चला
प्यार तुझसे मेरी जाँ इस कदर हो गया,
तुझपे कुर्बान हुए हमने सब लुटा दिया
और तू ही हमसे बेखबर हो गया।
माना कि प्यार तुझे भी उतना ही है
पर तेरी खामोशी से सब बेअसर हो गया।
आ चलें वापस सपनो के उस जहान में
हकीकत में तो जीवन ज़हर हो गया।
डॉ. आशु जैन 16/12/18

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