Sunday, January 6, 2019

योद्धा

लक्ष्मी!तुम अकेली नहीं हो
तुम जैसी और भी बहुत हैं
जो योद्धा की तरह
लड़ रहीं हैं
स्वयं से
एवं इस समाज से
समाज की
दोहरी मानसिकता से
जो कहता है
कि क्यों नहीं
तुमने
इकरार किया
उसके प्यार से
इनकार क्यों किया
अब अगर
उसने तुम पर
तेज़ाब फेंका
तो इसमें
उसकी क्या गलती?
शुक्र है
कि तुम
ऐसे समाज की
बातों में नहीं आईं।
लाखों टुकडों
में टूटकर भी
खुद को जोड़ा
और लड़ पड़ीं
समाज से कानून से
लेकर साथ अपने ही जैसी
और वीरांगनाओं को
खुद को साहस दिया
साथ ही
उन्हें भी जीवन
के नए रंग दिए।
तुम एक सच्ची
योद्धा हो
जो अनवरत लड़ रही है
इस पंगु समाज की
दोहरी मानसिकता से।
हम सबको तुम पर
गर्व है।

डॉ. आशु जैन 10/12/18

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