Monday, January 20, 2020

शबनम

ये शबनमी आँखें
ये चेहरे पे चमक
वाकई खुश हो या
बस दिखा रहे हो।
ये बार बार मुस्काना
धीरे से नजरें चुराना
दिल लग गया कहीं पे
या कुछ छिपा रहे हो।
मेरी नजरों में तुम हो
तुम अपने में गुम हो
कह दो जो कहना है
क्यों खुद को बहला रहे हो।
चोर नजर से देखते हो
हम देख लें तो झेंपते हो
इधर उधर की बातें बना के
धीरे से शरमा रहे हो।
आओ दो बातें करें
कुछ हसीं मुलाकातें करें
इस शबनमी मौसम में
क्यों हमको तड़पा रहे हो।

डॉ. आशु जैन 22/11/19

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