Monday, January 20, 2020

सुन लो न माँ

माँ
सुनो न
तुम्हारे होने से मेरा होना है
तुम्हारे खोने से मेरा खोना है
माँ
सुनो न
तुम रहती हो पास तो होती है आस
तुमसे ही तो है मुझे रब पे विश्वास
माँ
सुनो न
तुम हो तभी तक मैं सख्त हूँ
जो तुम नहीं तो मैं भी निशक्त हूँ।
माँ
सुनो न
मुझे जो हौसला दिया थोड़ा खुद भी ले लो
इतना कुछ झेला है थोड़ा और झेल लो
माँ
देखो न
बेटी तुम्हारी कितनी उदास है
आज मेरी आँखों को सिर्फ तुम्हारी तलाश है।
माँ
जीत जाओ न एक बार ये जंग
आ जाओ न वापस भर दो जीवन में उमंग।
माँ
सुनो न
बस एक बार सुन लो न।

डॉ. आशु जैन 12/12/19

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