Monday, January 20, 2020

सिकंदर

राहें उनको क्या रोकेंगी जिनकी नजरें मंजिल पर हैं
तूफाँ उनको क्या रोकेंगे आंखों में जिनके समंदर हैं
कर जाएंगे जो काम बड़ा उनका ही होगा नाम बड़ा
उनका क्या होगा नाम कभी जो छिपे घरों के अंदर हैं।
है हर एक मन शक्तिशाली पर कोने में डर पलता है
कायर!तू रोके क्यों खुद को,सूरज हर रोज निकलता है
मत रख हिसाब तू कर्मों का, वो रख लेगा ऊपरवाला
तू अपने दिल को खोल जरा इसमें ही छिपा बवंडर है।
जिसने खोजा खुद को खुद में, वो उसको ही मिल पायेगा
जो लगा रहा औरों पर ही वो क्या इतिहास बनाएगा
जिसने जीती सारी दुनिया वो भी निराश था हुआ कभी
पर तू निराश न हो जाना तेरे भीतर ही सिकंदर है।
डॉ. आशु जैन 18/09/19

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