Monday, January 20, 2020

कुंदन

आसान कहाँ है
कुंदन बनना?
पहले तपो
फिर पिटो
जुल्म सहो
सहते रहो
उफ्फ न करो
चुप ही रहो
रोते रहो
घुटते रहो
गैरों के हाथों
पिटते रहो
सिसकते रहो
बरसते रहो
आग की लपटों में
पिघलते रहो
छिलते रहो
मिटते रहो
हर दिशा से
कटते रहो
बलिदान दो
अपमान सहो
ख्वाहिशों में अपनी
सिमटते रहो
त्याग करो
परित्याग करो
इसी को अपना
सौभाग्य कहो
दिखावा करो
खुश रहने का
जबरदस्ती सबको
चमकते दिखो
बहुत मुश्किल है
कुंदन बनना
पूरा मिटना पड़ता है
कुंदन बनने के लिए।
डॉ. आशु जैन 25/09/19

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