जब जब अपनी भारत माँ पर
दुश्मन ने नज़र उठाई है
वीर जवानों ने बढ़ कर
सीने पे गोलियाँ खाई हैं।
ज्वालामुखी सी ज्वाला उनके
दिलों में जलती रहती है
देखें वो और दुश्मन भभके
ऐसी नजरें पाई हैं।
चपला सी तेजी उनके
कर्तव्यों में दिखती है
ऐसे वीरों ने निश्चित ही
भारत की शान बढ़ाई है।
एक दौर वो था जब हम सब
जकड़े थे ज़ंजीरो में
इन वीरों ने ही मिलकर
हम सबको मुक्ति दिलाई है।
इस वर्ष भी है जश्ने आज़ादी
जैसा था 47 में
खूबसूरती की मिसाल ने
इस वर्ष आज़ादी पाई है।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
अब भारत मिलकर एक हुआ
पर इस एकता की खातिर
वीरो ने जान गवाईं है।
बेटा चला गया पापा का
सिंदूर मिटा उस सजनी का
बाँधेगी वो किसको राखी
बहना की फूटी रुलाई है।
एक माँ का फर्ज निभाने को
दूजी माँ को तुम छोड़ गए
अश्रु नहीं रुकते उस माँ के
गहरी चोट जो खाई है।
हे वीर शहीदों तुम्हें नमन
नमन देश की मिट्टी को
ऐसे वीरों को पैदा करने की
ताकत जिसने पाई है।
बलिदान तुम्हारा अमर रहे
और तुम सबको अमरत्व मिले
भारत का सर न झुकने देंगे
ये कसमें हमने खाई हैं।
डॉ. आशु जैन 12/08/19
दुश्मन ने नज़र उठाई है
वीर जवानों ने बढ़ कर
सीने पे गोलियाँ खाई हैं।
ज्वालामुखी सी ज्वाला उनके
दिलों में जलती रहती है
देखें वो और दुश्मन भभके
ऐसी नजरें पाई हैं।
चपला सी तेजी उनके
कर्तव्यों में दिखती है
ऐसे वीरों ने निश्चित ही
भारत की शान बढ़ाई है।
एक दौर वो था जब हम सब
जकड़े थे ज़ंजीरो में
इन वीरों ने ही मिलकर
हम सबको मुक्ति दिलाई है।
इस वर्ष भी है जश्ने आज़ादी
जैसा था 47 में
खूबसूरती की मिसाल ने
इस वर्ष आज़ादी पाई है।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
अब भारत मिलकर एक हुआ
पर इस एकता की खातिर
वीरो ने जान गवाईं है।
बेटा चला गया पापा का
सिंदूर मिटा उस सजनी का
बाँधेगी वो किसको राखी
बहना की फूटी रुलाई है।
एक माँ का फर्ज निभाने को
दूजी माँ को तुम छोड़ गए
अश्रु नहीं रुकते उस माँ के
गहरी चोट जो खाई है।
हे वीर शहीदों तुम्हें नमन
नमन देश की मिट्टी को
ऐसे वीरों को पैदा करने की
ताकत जिसने पाई है।
बलिदान तुम्हारा अमर रहे
और तुम सबको अमरत्व मिले
भारत का सर न झुकने देंगे
ये कसमें हमने खाई हैं।
डॉ. आशु जैन 12/08/19
No comments:
Post a Comment