तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
मौसम कोई भी हो पर तू नहीं सूखे
मैं प्रेम प्यास पल पल बुझाता रहूँ।
जब तू कभी रूठे और उल्टा बहे
मैं किनारे पे गोता लगाता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
जब चाँदनी तुझ ही में नहाने लगे
मैं तुझे देख प्रिय मुस्कुराता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
जब सूरज की रश्मियाँ जलाने लगें
मैं शीतलहर बन तुझे सहलाता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
जब सर्दियां सताएं बर्फ जमने लगे
मैं प्रेम की अग्नि से पिघलाता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
डॉ. आशु जैन 09/08/19
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
मौसम कोई भी हो पर तू नहीं सूखे
मैं प्रेम प्यास पल पल बुझाता रहूँ।
जब तू कभी रूठे और उल्टा बहे
मैं किनारे पे गोता लगाता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
जब चाँदनी तुझ ही में नहाने लगे
मैं तुझे देख प्रिय मुस्कुराता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
जब सूरज की रश्मियाँ जलाने लगें
मैं शीतलहर बन तुझे सहलाता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
जब सर्दियां सताएं बर्फ जमने लगे
मैं प्रेम की अग्नि से पिघलाता रहूँ
तू बन जाए मेरे प्रेम का सरोवर
मैं तुझमे ही डुबकी लगाता रहूँ।
डॉ. आशु जैन 09/08/19
No comments:
Post a Comment