समय का पहिया अपनी गति से चलता है
तो फिर तू किस सोच में प्यारे घुलता है।
आज किसी का है वो कल तेरा होगा
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
कल जो दुश्मन थे दोस्त बन जाएंगे
अपने कल सपने बनकर ठुकरायेंगे
क्यों आशा रखकर खुद को तू छलता है?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
रिश्ते नाते सब माया के बन्धन हैं
मन में अधिक बढ़ाते ये सब उलझन हैं
क्यों माया के आँचल में तू पलता है?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
कल जो प्यार जताते थे खो जायेंगे
तुझसे पहले किसी के वो हो जायेंगे
प्यार की झूठी आग में तू क्यों जलता है!?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
तेरे दिल तक जो पहुँचे मिल जाएगा
सपनों से अपना बन बाहर आएगा
तेरा दुःख जिसकी आँखों में खलता है
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
डॉ. आशु जैन 20/01/2020
तो फिर तू किस सोच में प्यारे घुलता है।
आज किसी का है वो कल तेरा होगा
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
कल जो दुश्मन थे दोस्त बन जाएंगे
अपने कल सपने बनकर ठुकरायेंगे
क्यों आशा रखकर खुद को तू छलता है?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
रिश्ते नाते सब माया के बन्धन हैं
मन में अधिक बढ़ाते ये सब उलझन हैं
क्यों माया के आँचल में तू पलता है?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
कल जो प्यार जताते थे खो जायेंगे
तुझसे पहले किसी के वो हो जायेंगे
प्यार की झूठी आग में तू क्यों जलता है!?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
तेरे दिल तक जो पहुँचे मिल जाएगा
सपनों से अपना बन बाहर आएगा
तेरा दुःख जिसकी आँखों में खलता है
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।
डॉ. आशु जैन 20/01/2020
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