Monday, January 20, 2020

समय का पहिया

समय का पहिया अपनी गति से चलता है
तो फिर तू किस सोच में प्यारे घुलता है।
आज किसी का है वो कल तेरा होगा
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।

कल जो दुश्मन थे दोस्त बन जाएंगे
अपने कल सपने बनकर ठुकरायेंगे
क्यों आशा रखकर खुद को तू छलता है?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।

रिश्ते नाते सब माया के बन्धन हैं
मन में अधिक बढ़ाते ये सब उलझन हैं
क्यों माया के आँचल में तू पलता है?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।

कल जो प्यार जताते थे खो जायेंगे
तुझसे पहले किसी के वो हो जायेंगे
प्यार की झूठी आग में तू क्यों जलता है!?
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।

तेरे दिल तक जो पहुँचे मिल जाएगा
सपनों से अपना बन बाहर आएगा
तेरा दुःख जिसकी आँखों में खलता है
तू चाहे न चाहे वक्त बदलता है।

डॉ. आशु जैन 20/01/2020

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