Monday, January 20, 2020

शरद का चाँद

धन्य हो गई धरा
धन्य हुआ आसमान
और धन्य हो गया
शरद पूर्णिमा का चाँद।
धन्य हुआ कण-कण
धन्य हुआ प्रतिक्षण
धन्य हुआ मानव और
धन्य हुआ ये जहान।
शरद पूर्णिमा का चाँद
खुद पे है लजा गया
उस से भी मधुर एक
चाँद नीचे आ गया।
आज है वही दिवस
जब देवता आये उतर
जन्म हुआ गुरुवर का
श्रीमती-मलप्पा के घर
रात्रि में भी चन्द्रमा
दिवस में भी चन्द्रमा
प्रकृति भी हो गई थी
बहुत सुंदर अनुपमा।
ऐसा लग रहा था मानो
एक चाँद कम था
तभी तो आचार्य श्री का
हुआ भव्य जनम था।
कलयुग में सतयुगी
जीव कोई आया है
महावीर के संदेशे
ऊपर से लाया है।
धर्म को मिली दिशा
अहिंसा का बढा मान
गुरु विद्यासागर का
ध्येय है जन कल्याण।
गुरुवर के चरणों में
नतमस्तक धरा है
और आसमान से
अमृत भी झरा है।
आज का ये दिन पावन
धन्य है शरद ऋतु
गुरुदेव के चरणों में
बारम्बार नमोस्तु।
आशु का नमोस्तु।।।

©डॉ. आशु जैन 13/10/19

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