अपने दिल की हर धड़कन पे
नाम तुम्हारा लिखती हूँ
साँसों की माला पे हरदम
तुमको पी मैं सिमरती हूँ।
तुम मेरे जीवन का सपना
हर रात जिसे मैं लखती हूँ
तुम सागर की लहरें जानम
संग जिनके मैं बहती हूँ।
तुम मेरा मजबूत सहारा
काँधे जिसके सर रखती हूँ
जैसे बेल वृक्ष से लिपटे
वैसे ही तुमसे लिपटी हूँ।
जैसे चकोर चाँद को चाहे
वैसे तुमको मैं चाहूँ
वर्षा की राह पपीहा देखे
वैसे राह मैं तकती हूँ।
तुम सब पर न्यौछावर होते
मैं बस तुमपे मरती हूँ
एक जन्म में दिखा न पाऊँ
इतना प्यार मैं करती हूँ।
डॉ आशु जैन 08/07/19
नाम तुम्हारा लिखती हूँ
साँसों की माला पे हरदम
तुमको पी मैं सिमरती हूँ।
तुम मेरे जीवन का सपना
हर रात जिसे मैं लखती हूँ
तुम सागर की लहरें जानम
संग जिनके मैं बहती हूँ।
तुम मेरा मजबूत सहारा
काँधे जिसके सर रखती हूँ
जैसे बेल वृक्ष से लिपटे
वैसे ही तुमसे लिपटी हूँ।
जैसे चकोर चाँद को चाहे
वैसे तुमको मैं चाहूँ
वर्षा की राह पपीहा देखे
वैसे राह मैं तकती हूँ।
तुम सब पर न्यौछावर होते
मैं बस तुमपे मरती हूँ
एक जन्म में दिखा न पाऊँ
इतना प्यार मैं करती हूँ।
डॉ आशु जैन 08/07/19
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