Monday, January 20, 2020

ओ 2019

ओ 2019,
जा तो रहे हो तुम
लेकिन पीछे से छूटी है
दिलों में गहरी टीस।
तुमसे एक ही है विनती
लौटकर न आना
न देना जख्म फिर से
न बेटियों को सताना।
एक और है गुजारिश
जो मान लो अगर तुम
तुम जैसा कोई साल
न देखें फिर कभी हम।
वैसे तो ये विदाई,
होती बड़ी दुखद है
पर तुम्हारा ऐसा जाना
लागे बड़ा सुखद है।
कोशिश यही करेंगे
लम्बी हो ये जुदाई
तुम लौटकर न आना
दें ऐसी हम विदाई।

डॉ. आशु जैन 30/12/19

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