Monday, January 20, 2020

गुजर बसर

अब तेरे बगैर गुजर - बसर मुश्किल है
कटेंगे कैसे ये सातों पहर मुश्किल है
जब से गया है तू, रत्ती भर न सरका ये वक्त
रात ही रात है होगी अब तो सहर मुश्किल है।
जिंदा रखने को मुझे तेरी एक झलक काफी है
मारेगा मुझे तूफानों का कहर मुश्किल है।
दिल में बस तू , तू और तू ही बसता है
इस जगह किसी और का असर मुश्किल है।
पाने को तुझे हर जतन कर लिया
बची होगी कोई कसर मुश्किल है।
जो लिखा होता मेरी किस्मत में तो तू मिलता
अब तो मुझ पर उस रब की महर मुश्किल है।
हर सफर में तो हम साथ साथ चले
बन पायेगा तू हमसफ़र मुश्किल है।


डॉ. आशु जैन 06/07/19

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