Monday, January 20, 2020

देवता या दानव

दानवों से पट रहा संसार क्यों
देवता सभी हुए असार क्यों
मानवीयता हुई लाचार क्यों
बेटियों पे बढ़ा अत्याचार क्यों?

संस्कृति पे देश की प्रहार क्यों
विदेशी भाषाओं का है प्रचार क्यों
कानून हो रहा है शर्मसार क्यों
मानवों का हो रहा व्यापार क्यों?

बन रहे हैं सब यहाँ करतार क्यो
कह रहे हैं खुद को पालनहार क्यों
हो रहा है भ्रष्टो का सत्कार क्यों
कर रही माँ भारती चीत्कार क्यों?

युवा पीढ़ी इतनी बेकरार क्यों
दौड़ है या होड़ बेशुमार क्यों
सब्र का नहीं कोई सवार क्यों
चारों तरफ है ये हाहाकार क्यों?

पल रहे हैं मन में सब विचार क्यों
हैं मानव तो पशुवत व्यवहार क्यों
करो प्रार्थना हे ईश अब स्वीकार तुम
कि इंसानियत से बना दो संसार तुम।

डॉ. आशु जैन 02/10/19

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