ये कैसा इत्तेफ़ाक़ है, ये कैसा संयोग
ये खुद बखुद हुआ या लगाया कोई योग
भूली हूँ संसार को, धारा तुम्हारा जोग
बाहर से तो स्वस्थ हूँ, दिल को लगाया रोग।
हर कोई इससे गुजरा, नया नही है ये प्रयोग
किस्मत में क्यों सभी की, आ जाता है वियोग
जब परिस्थिति अनुकूल थी सबका मिला सहयोग
हवा जरा विरुद्ध हुई, लगने लगा अभियोग।
कुछ भी हो साथ रहना है, चाहे कहो हठयोग
जब मिल जायेंगे हम तुम फिर, बन जाएगा सुयोग
किस्मत में लिखा जाएगा फिर से नया संयोग
न होंगी कोई दूरियां न होगा फिर वियोग।
डॉ. आशु जैन 27/09/19
ये खुद बखुद हुआ या लगाया कोई योग
भूली हूँ संसार को, धारा तुम्हारा जोग
बाहर से तो स्वस्थ हूँ, दिल को लगाया रोग।
हर कोई इससे गुजरा, नया नही है ये प्रयोग
किस्मत में क्यों सभी की, आ जाता है वियोग
जब परिस्थिति अनुकूल थी सबका मिला सहयोग
हवा जरा विरुद्ध हुई, लगने लगा अभियोग।
कुछ भी हो साथ रहना है, चाहे कहो हठयोग
जब मिल जायेंगे हम तुम फिर, बन जाएगा सुयोग
किस्मत में लिखा जाएगा फिर से नया संयोग
न होंगी कोई दूरियां न होगा फिर वियोग।
डॉ. आशु जैन 27/09/19
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