पिछले 20 दिनों से अनु उसका पति मितेश और उसकी दो साल की बेटी न्यासा मुम्बई के अस्पताल में अनु की मां का इलाज करा रहे थे। माताजी का स्वास्थ्य बहुत ज्यादा खराब हो चुका था और उन्हें आनन फानन में ICU में भर्ती किया गया था। शरीर में रक्त, प्रोटीन और महत्वपूर्ण विटामिन की कमी थी, शरीर जर्जर हो चुका था उम्मीद टूटती जा रही थी। अनु दिन रात प्रार्थना करती अंदर ही अंदर घुटती, खून के आँसू रोती लेकिन माँ के सामने मजबूती से खड़ी रहकर प्रोत्साहित करती और उन्हें समझाती कि वे जल्दी ही ठीक हो जायेंगी। अनु के लिए उसकी माँ दुनिया में सबसे ज्यादा अज़ीज़ थीं क्योंकि उनके अलावा उसका अपना कोई नहीं था। रिश्तेदारों ने तो अनु की शादी के बाद ही उससे रिश्ता तोड़ लिया था, मामा लोगों से भी जो उम्मीद थी वह भी इस कठिन दौर में टूट गई थी। माताजी का गिरता स्वास्थ्य और उनका बहकी-बहकी बातें करना, भूल जाना इत्यादि अनु को भीतर से कमजोर कर रहा था। इसी बीच 12 दिसम्बर को उसकी और मितेश की शादी की सालगिरह थी, लेकिन इस दशा में उन दोनों को याद ही नही रहा। सब कुछ वैसे ही चल रहा था कि अचानक माताजी ने पूछा आज कितनी तारीख है और जैसे ही अनु ने कहा आज 12 दिसंबर है माँ तो वह बोली अरे आज तो तुम्हारी सालगिरह है। इतना सुनते ही अनु की आँखों से झर झर आँसू बहने लगे आखिर इससे अच्छी कोई और सौगात हो सकती थी उसकी सालगिरह की?
डॉ. आशु जैन 31/12/19
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