Monday, January 20, 2020

वो गरीब!!

शीत लहर, बनी कहर
न आ रही कहीं पकड़
सब बेअसर सा हो गया
गरीब वो गुजर गया
 प्रकृति के कोप से
 ठंड के प्रकोप से
 वो सर्दी में ठिठुर गया
 गरीब वो गुजर गया।
 कम्बलों की खोज में
 मन्दिरों में मस्जिदों में
 गाँव से शहर गया
 गरीब वो गुजर गया।
 गांव मिटे बने शहर
 हमने फैलाया जहर
 वो बेचारा मर गया
 गरीब वो गुजर गया।
 न सेकता न तापता
 वो हो गया है लापता
 ठंड से वो डर गया
 गरीब वो गुजर गया।

डॉ. आशु जैन 03/01/2020

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