Monday, January 20, 2020

रोशनी

तुमने आकर ज़िन्दगी में
रोशनी राहों में भर दी
हमने भी हंसते हुए ये
ज़िन्दगी तेरे नाम कर दी।
क्या हुआ जो जख्म लाखों
झेले थे नादाँ से दिल ने
तुमने आकर सूने हृदय में
प्यार की बरसात कर दी।
एक तड़प थी कुछ कमी थी
कुछ अधूरापन था बाकी
थामकर ये हाथ मेरा
सारी कमियाँ पूरी कर दी।
मुस्कुराहट भूल बैठी
लब पे रीतापन था गहरा
अब खिली हूँ खिल गई हूँ
मांग जो सिंदूरी भर दी।

डॉ. आशु जैन 13/11/19

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