Saturday, December 1, 2018

ग़लतफ़हमी

गलतफहमियों से अट गए रिश्ते
उधड़े , टूटे, फट गए रिश्ते,
सब चलते थे साथ साथ पर
जाने कैसे कट गए रिश्ते।
भाई भाई का दुश्मन हो गया
गाजर घास से पट गए रिश्ते
भ्रम की चारों ओर दीवारें
दीवारों में ही घुट गए रिश्ते।
क्या सगा क्या सौतेला था
खून- खून के लुट गए रिश्ते।
कभी जुदा न हो सकते थे
वे भी देखो मिट गए रिश्ते।
पी कर भ्रम का घोर हलाहल
घिसट घिसट कर मरते रिश्ते
सांस उन्हें अब ले लेने दो
सिमट सिमट कर तरसे रिश्ते।
मत बनने दो बोझ उन्हें
हैं प्यारे प्यारे हल्के रिश्ते
तोड़ो भ्रम की ये दीवारें
खिलखिला दे फिर से रिश्ते।
डॉ. आशु जैन 26/11/18

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