Saturday, December 1, 2018

मजा

आज बारिश में भीगने का मजा आ गया
आंखों में आंसुओं का जलजला आ गया
जी भर के भीगे, जी भर के रोये
बेजार रोने का मजा आ गया।
भरी बरसात और तेरी याद, वाह!!
दोनों के साथ होने का मजा आ गया।
तेरी यादें अक्सर आंखे नम किया करतीं थीं
तेरी यादों को भिगोने का मजा आ गया।
हर पल रोया है दिल, तुझे खोने के बाद
आज यादों में खोने का मजा आ गया।
मैं तुझे ढूँढा करती थी बाहर हर जगह
आज खुद में तेरे होने का मजा आ गया।
पहले तेरी बातें इधर उधर की लगती थीं
आज बातों की कड़ियाँ पिरोने का मजा आ गया।
अब तलक अकेली थी मैं तन्हाइयों से घिरी
सुनसान सड़कों पे तेरे साथ होने का मजा आ गया
जिस्म तो बने ही हैं जुदा होने के लिए
रूह से रूह के साथ होने का मजा आ गया।
डॉ. आशु जैन 24/11/18

No comments:

Post a Comment

स्वाभिमान - लघुकथा

मन बड़ा आहत है जब से मीता ने रमेश को कहते सुना अरे मेरी बीवी किसी काम की नहीं। बस खाना बनाती है और सारा दिन पड़ी रहती है। पढ़ी लिखी है लेकिन न...