Friday, November 23, 2018

प्रशंसा/ सराहना/ तारीफ


पाकर प्रशंसा अपनी फूले हैं हम
खुद के सामने सबको भूले हैं हम
हर दिन नया एक वहम पाल लेते हैं
खुद की तारीफ करके अहं को संभाल लेते हैं।
जो कोई न करे तारीफें हमारी
खतरे में पड़ जाती है उसके संग यारी
पुराने किस्सों से वाह वाही खंगाल लेते हैं
खुद की तारीफ करके अहं को संभाल लेते हैं।
गर कोई भूल जाए नाम लेना हमारा
हमने फिर उसका हर काज बिगाड़ा
उसके कामों में अपना नाम निकाल लेते हैं
खुद की तारीफ करके अहं को संभाल लेते हैं।
दो कंधों पे दुनिया की जिम्मेदारी उठाई
जो ये न कहे उसकी शामत है आई
उसके मुख से ये बात निकाल लेते हैं
खुद की तारीफ करके अहं को संभाल लेते हैं।
जिस दिन फूटेगा अहम का ये गुबार
उस दिन उतरेगा वहम का ये खुमार
चल रहे हो जो अब तक आंखों को मीचे
पाओगे खुद को नीचे बहुत नीचे
मत भागो पीछे तारीफों के सम्मान के
मत बढाओ अहंकार को पद के और नाम के
दो पल की खुशी जीवन भर का नुकसान
तारीफ के चक्कर में बर्बाद होता इंसान।
डॉ. आशु जैन 16/11/18

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