Friday, November 23, 2018

सुकून


कितना सुकून था उन लम्हों में
जो अब पीछे गुजर गए
वक्त का हाथ थामकर देखो
हम कितने आगे निकल गए
छूट गए वो सारे पल छिन
जिनमें था माँ का प्यार बसा
अब तो बस यादें ज़िंदा हैं
सुबह शाम और भोर निशा
एक प्रार्थना रोज करूं ये
मैं अपने भगवान से
देना है तो दे नव जीवन
मेरी माँ के नाम से
अब जब भी मैं नव जीवन पाऊँ
मेरी माँ मुझे मिल जाए
उसकी गोद में लोरी सुनकर
चैन ओ सुकून आ जाए।
सारे उपवासों का फल दे
और भक्ति का दे उपहार
मेरी माँ बस मिले मुझे ही
बने वो मेरी पालनहार।
डॉ. आशु जैन 14/11/18

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