Friday, November 23, 2018

गद्य-दीपोत्सव में बढ़ता चायनीज हस्तक्षेप घातक है


विषय पर बात करने से पूर्व मैं एक प्रश्न का उत्तर चाहती हूँ वह यह है कि कोई हमारे जीवन में हस्तक्षेप कब कर सकता है? उत्तर है जब हम स्वयं किसी को ऐसा करने दें। दीपावली आती है और हमें चायनीज वस्तुएँ दिखने लगती है जैसे बाकी समय चायनीज वस्तुओं को कोई उपयोग ही नही करता। सरकार पर उंगलियां उठने लगती हैं कि सरकार के कारण चायनीज बाज़ार भारतीय बाजार पर भारी पड़ता है किंतु खुद की आदतों को बदलने के लिए कोई तैयार नही है। ये तो बिल्कुल वैसी ही बात है कि शराब की दुकानों को सरकार बंद नही कर रही जबकि सरकार को पता है कि शराब जीवन को कितना नुकसान पहुचाती है लेकिन इसका अर्थ यह तो नही की सभी शराब का सेवन करने लगें। बिल्कुल उसी तरह जब सभी को पता है कि चायनीज वस्तुएँ देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही है फिर भी उन्हें क्यों खरीदा जाता है? आवश्यकता है स्वयं को बदलने की और जागरूकता फैलाने की।
इस दीवाली पर नहीं इस दीवाली से ये प्रण करना चाहिए कि चायना के सामान का बहिष्कार करेंगे, जिस दिन चायना का सामान भारत मे बिकना बंद हो जाएगा भारत के लघु उद्योग कुछ हद तक पटरी पर आ जायगे। कुछ हद तक इसलिए क्योंकि भारतीयों के पास अभी तक इतनी उन्नत तकनीक नहीं है कि चायना के समान सस्ती वस्तुएँ नहीं बना सकें।
यदि पूरा देश ठान ले कि चायना का सामान नही खरीदेंगे तो बहुत जल्द संभव है कि हम अपने लघु उद्योगों को जीवनदान दे सकेंगे।
डॉ. आशु जैन 1/11/18

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