Sunday, October 14, 2018

Me Too


हाँ आज कहती हूँ मैं
नहीं कहा जो अब तक
सहती आयी जो अब तक
अब नहीं सहूँगी मैं
चुप नहीं रहूँगी मैं
देख लिया रिश्तों को
इतने क़रीब से
कि आती है घिन मुझे
अपने नसीब से
अपने मन की दीवारों पे
जो राज छिपाए थे मैंने
माँ तुमसे भी छिपकर
आँसू बहाए थे मैंने
अब बताऊँगी खुलके सबको
ज़ख़्म दिखेंगे मनके सबको
जब छोटी सी बच्ची थी मैं
दिल की एकदम सच्ची थी मैं
नहीं मालूम था गुड टच बैड टच
क़सम से झूठ नहीं मैं कह रही हूँ सच
हो भले वो बुज़ुर्ग या रिश्ते के भाई
मेरी अस्मिता पे तो जैसे शामत थी आयी
पहले लगा रिश्ते शायद ऐसे ही होते है
देर से अकल आयी कि ये तो बस धोखे है
धीरे धीरे बड़ी हुई अपने पैरों पर खड़ी हुई
यौवन ने दस्तक दी थी किसी से मुझे मोहब्बत हुई थी
नया नया प्यार था भरोसा बेशुमार था
एक दिन भरोसा टूट गया, मेरा प्यार मुझे ही लूट गया
प्यार तो मैंने किया था उसने तो मुझे सिर्फ़ छला था
अब जाके समझ में आया कौन बुरा कौन भला था
पश्चात्ताप में जलती रही , मन ही मन मैं घुलती रही
थोड़ी थोड़ी दिन - रात और सुबह शाम मैं पिघलती रही
अगर यूँ ही घुलती रही तो एक दिन ख़त्म हो जाऊँगी
किसी को क्या मेरी फ़िक्र है जो याद किसी को रह पाऊँगी
लगता था दुनिया की मैं ही एक अभागन हूँ
रिश्तों ने था जिसे डसा मैं एक ऐसी नागिन हूँ
जब जाना metoo के बारे में तब ये बात पता चली
इससे नहीं अछूती थी किसी भी शहर की कोई भी गली
पहले लगता था कि मैं हूँ तनहा यहाँ खड़ी
अब जाना लाखों मुझ जैसी कोई छोटी कोई बड़ी
डर लगता था कैसे अपने मन की बात बताऊँ मैं
नहीं ग़लत हूँ मैं बेबस हूँ कैसे सबको समझाऊँ मैं
भला हो me too वालों का जिनने दिल से दर्द निकाल दिया
अब मैंने भी दिल हल्का कर अपना बोझ उतार दिया.
डॉ. आशु जैन

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