Tuesday, October 9, 2018

ख्वाहिश

यूँ तो अधूरी रही हर ख्वाहिश 
तू मिला तो लगा पूरी हो गई
साथ जीना जरुरी था हमारे लिए
लेकिन लगता है कोई मज़बूरी हो गई .
इतने पास रहे हम सदा
अब क्यों ये अचानक दूरी हो गई
तू था दिल में तो धड़कता था दिल
अब तो ये धड़कन जरुरी हो गई .
हम मिले , साथ चले और बिछड़े
बिछड़कर तुझसे मैं अधूरी हो गई
साथ मेरे तेरी यादे और तन्हाई है
अब तो इनसे ही मेरी ज़िन्दगी पूरी हो गई .
डॉ. आशु जैन 08/10/2018




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