कान्हा
क्यों तुम
बार बार
बात बात पर
छलते हो मुझे
क्यों नही
इस जहां के
पार
अपने उस जहाँ में
ले चलते हो मुझे?
क्यों झूठ कहते हो
कि राधा
तुम्हारी रानी है
जबकि
गोपियों संग भी
तुम्हे तो
रास लीला
रचानी है?
क्यों कहते हो
कि दिल पर
तुम्हारे
सिर्फ मेरा
अधिकार है
क्या अपनी
गोपियों से
तुम्हें कुछ
कम
प्यार है?
सुनो कान्हा!
अब
तो कहो
सत्य
मत ओढ़ो
असत्य,
तुम्हारे मुख से
बार बार
सुनना
कितना अच्छा
लगता है,
एक बार
फिर से
कह दो न
कि
कान्हा का तो
सारा जग
दीवाना है
लेकिन
कान्हा
सिर्फ
राधा का
दीवाना है।
और ये
सिर्फ सत्य होगा
समझे।
डॉ. आशु जैन 17-10-18
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