Monday, October 8, 2018

कर्तव्य



क्या याद है तुम्हे

जिस दिन तुमने

अपने हाथों में

मेरा हाथ लेकर

साथ जीने मरने की

कसम खाई थी

बिल्कुल उसी दिन से

मैंने भी

तुम्हारी हर

जिम्मेदारी

अपनी समझकर

निभाई थी

जिस दिन

तुमने अपने कर्तव्यों का

वास्ता देकर

कुर्बान किया था

मेरे हिस्से का प्यार

उस दिन भी

तुम पर

न्योछावर कर

दिया था मैने खुद को

तुम्हारे ही दायित्वों पर

उन्हें अपना समझकर

लेकिन

क्या मैं नही कुछ भी

तुम्हारे लिए?

क्या मेरे प्रति

तुम्हारा कोई

कर्तव्य नहीं?

जब अपने

कर्तव्यों से

मुक्त हो जाओ

तो सोचकर बताना।

डॉ. आशु जैन

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