कर्तव्य पथ पर यूँ चलूँ मैं
भूलूँ कभी न राह,
भारत माँ की करूँ मैं सेवा
हो पूरी हर चाह।
कभी कदम न डगमगाए
कभी न निकले आह
मृत्यु भी गर सामने हो तो
डर न मुझे छू पाए।
कितनी भी बाधाएँ आये
मुश्किल हो हर राह
नही हटूँगा अब मैं पीछे
चाहे जो हो जाये।
होगी हर एक बेटी सुरक्षित
दुनिया मे जो आये
भारत माँ का नाम भी अब
स्वर्णाक्षरों में लिखा जाये।
मिलकर करें कर्तव्य का पालन
कर्म से जी न चुरायें
भारत माँ की सेवा में
ये कदम बढ़ते ही जायें।
डॉ. आशु जैन
भूलूँ कभी न राह,
भारत माँ की करूँ मैं सेवा
हो पूरी हर चाह।
कभी कदम न डगमगाए
कभी न निकले आह
मृत्यु भी गर सामने हो तो
डर न मुझे छू पाए।
कितनी भी बाधाएँ आये
मुश्किल हो हर राह
नही हटूँगा अब मैं पीछे
चाहे जो हो जाये।
होगी हर एक बेटी सुरक्षित
दुनिया मे जो आये
भारत माँ का नाम भी अब
स्वर्णाक्षरों में लिखा जाये।
मिलकर करें कर्तव्य का पालन
कर्म से जी न चुरायें
भारत माँ की सेवा में
ये कदम बढ़ते ही जायें।
डॉ. आशु जैन
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