मैं जब जब साँस लेती हूँ वो हिंदी में ही आती है,
बिना हिंदी मेरी साँसे जाने क्यों थम सी जाती हैं।
मैं जब भी आह भरती हूँ वो हिंदी में निकलती है,
बताओ आप अब इसमें कहाँ पर मेरी गलती है।
आँखों से मेरे आंसू भी हिंदी में बरसते हैं,
आजकल ये कान हिंदी को तरसते हैं।
बताना दर्द अपना हिंदी में ही अच्छा लगता है,
कोई बोले जो हिंदी तो बड़ा सच्चा सा लगता है।
खुशियो की मेरी चाबी बस ये मेरी हिंदी है,
बिना इसके मेरा लेखन तो बस फिर चिन्दी चिन्दी है।
कि मैं जब मौन होती हूँ तो हिंदी में ही होती हूँ,
कि जब मैं टूट जाती हूँ तो हिंदी में ही रोती हूँ।
मेरी हर मुस्कराहट का नया सोपान है हिंदी,
मेरी हर सुबह है हिंदी मेरी हर शाम है हिंदी।
कि दिल जब भी मेरा टूटा वो हिंदी में ही है टूटा,
करें क्या बात ग़ैरों की इसे तो अपनों ने ही लूटा।
मेरी पूजा मेरी श्रद्धा मेरा भगवान है हिंदी,
नए युग की नई शुरुआत का पैगाम है हिंदी।
सुनकर बातें मेरी हिंदी हँसकर बोली,
ले लगा ले अपने माथे पे ये मेरी रोली।
मेरी रोली ही जग में तेरा नाम करेगी,
हिंदी भाषा ही तेरी पहचान बनेगी।
मूरख हैं वो अभी नींद से नहीं है जागे,
मुझे छोड़ जो किसी गैर के पीछे भागे।
जब जागेंगे 'अश्क' बहुत वो पछतायेंगे,
यहाँ के न वो वहाँ के होके रह पाएंगे।
डॉ आशु जैन
बिना हिंदी मेरी साँसे जाने क्यों थम सी जाती हैं।
मैं जब भी आह भरती हूँ वो हिंदी में निकलती है,
बताओ आप अब इसमें कहाँ पर मेरी गलती है।
आँखों से मेरे आंसू भी हिंदी में बरसते हैं,
आजकल ये कान हिंदी को तरसते हैं।
बताना दर्द अपना हिंदी में ही अच्छा लगता है,
कोई बोले जो हिंदी तो बड़ा सच्चा सा लगता है।
खुशियो की मेरी चाबी बस ये मेरी हिंदी है,
बिना इसके मेरा लेखन तो बस फिर चिन्दी चिन्दी है।
कि मैं जब मौन होती हूँ तो हिंदी में ही होती हूँ,
कि जब मैं टूट जाती हूँ तो हिंदी में ही रोती हूँ।
मेरी हर मुस्कराहट का नया सोपान है हिंदी,
मेरी हर सुबह है हिंदी मेरी हर शाम है हिंदी।
कि दिल जब भी मेरा टूटा वो हिंदी में ही है टूटा,
करें क्या बात ग़ैरों की इसे तो अपनों ने ही लूटा।
मेरी पूजा मेरी श्रद्धा मेरा भगवान है हिंदी,
नए युग की नई शुरुआत का पैगाम है हिंदी।
सुनकर बातें मेरी हिंदी हँसकर बोली,
ले लगा ले अपने माथे पे ये मेरी रोली।
मेरी रोली ही जग में तेरा नाम करेगी,
हिंदी भाषा ही तेरी पहचान बनेगी।
मूरख हैं वो अभी नींद से नहीं है जागे,
मुझे छोड़ जो किसी गैर के पीछे भागे।
जब जागेंगे 'अश्क' बहुत वो पछतायेंगे,
यहाँ के न वो वहाँ के होके रह पाएंगे।
डॉ आशु जैन
No comments:
Post a Comment