ज़िक्र जब जब तेरा मेरी ज़ुबान पे आता है
मेरा तन बदन खिलता है महक सा जाता है।
खुशबू तेरी मेरी बातों से आने लगती है
दिल मेरा जोरों से धड़क सा जाता है।
हम क्यों जुदा हुए कोई जानता नहीं
सोचकर हर बार मेरा मन तड़प सा जाता है।
जब याद आती है वो पहले प्यार की बात
मीठी मुलाकात का शोला भड़क सा जाता है।
क्या तदबीर करूँ कि हो जाए मुलाकात
तुझ तक आने वाला हर रास्ता भटक सा जाता है।
जब चाहूँ तुझे पाना तेरे साथ उम्र बिताना
मेरा ये ख्याल जमाने को खटक सा जाता है।
डॉ. आशु जैन 08/05/19
मेरा तन बदन खिलता है महक सा जाता है।
खुशबू तेरी मेरी बातों से आने लगती है
दिल मेरा जोरों से धड़क सा जाता है।
हम क्यों जुदा हुए कोई जानता नहीं
सोचकर हर बार मेरा मन तड़प सा जाता है।
जब याद आती है वो पहले प्यार की बात
मीठी मुलाकात का शोला भड़क सा जाता है।
क्या तदबीर करूँ कि हो जाए मुलाकात
तुझ तक आने वाला हर रास्ता भटक सा जाता है।
जब चाहूँ तुझे पाना तेरे साथ उम्र बिताना
मेरा ये ख्याल जमाने को खटक सा जाता है।
डॉ. आशु जैन 08/05/19
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