Monday, January 20, 2020

अंधेरा उजाला

रातों को बदनाम किया करते हैं
जो शख्स बुरे काम किया करते हैं।
है जरूरी अगर दिन तो रात भी है
थकन के बाद ही तो आराम किया करते हैं।
सिर्फ उजाले से जीवन न चल सकेगा
न हो गर तिमिर तो पल-पल डसेगा
खुली आंखों से ही इश्क पूरा नहीं होता
बन्द आँखों से भी क़त्लेआम किया करते हैं।
घोर आशा से भी जीवन बर्बाद होता है
प्यास बिना पानी को कौन रोता है
कड़ी धूप में छाया की कदर होती है
वरना हम कहाँ पेडों का इंतजाम किया करते हैं।
सूरज की तपिश से बचाने के लिए
चाँदनी आती है जख्म छिपाने के लिए
गर न हो तपन तो कौन पूछेगा चांदनी को
हम कहाँ जख्मो को सरे आम किया करते हैं।

डॉ. आशु जैन 08/01/2020

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