सुखी रहें सब जीव जगत के
ऐसी समता कहाँ से लाऊँ,
हर पाऊँ सबकी बाधाएं
ऐसी क्षमता कहाँ से लाऊँ
सब जीवों पर करूणा बरसे
ऐसी ममता कहाँ से लाऊँ
सत्य अहिंसा हँस के पालूँ
वो प्रसन्नता कहाँ से लाऊँ?
कभी किसी का दिल न दुखाऊँ
वो समानता कहाँ से लाऊँ
ध्यान समाधि में बह जाऊँ
वो गहनता कहाँ से लाऊँ?
पाप कर्म सब नष्ट कर सकूँ
वो पावनता कहाँ से लाऊँ
मैं भी महावीर बन जाऊँ
वो महानता कहाँ से लाऊँ।
डॉ. आशु जैन 17/04/19
ऐसी समता कहाँ से लाऊँ,
हर पाऊँ सबकी बाधाएं
ऐसी क्षमता कहाँ से लाऊँ
सब जीवों पर करूणा बरसे
ऐसी ममता कहाँ से लाऊँ
सत्य अहिंसा हँस के पालूँ
वो प्रसन्नता कहाँ से लाऊँ?
कभी किसी का दिल न दुखाऊँ
वो समानता कहाँ से लाऊँ
ध्यान समाधि में बह जाऊँ
वो गहनता कहाँ से लाऊँ?
पाप कर्म सब नष्ट कर सकूँ
वो पावनता कहाँ से लाऊँ
मैं भी महावीर बन जाऊँ
वो महानता कहाँ से लाऊँ।
डॉ. आशु जैन 17/04/19
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