वो
सबसे अलग
निराला जगत में
मेरा प्रभु
कन्हैया।
माखनचोर
मटकी फोड़ता
चुराता राधा की
कढाई वाली
चुनरिया।
रचाये
रास लीला
सब गोपियों संग
बनता है
नचैया।
पार
लगाता है
भटकती नाव को
संसार से
खिवैया।
हरता
दुख बाधाएँ
भर देता झोली
मेरा कृष्ण!
हरैया।
डॉ. आशु जैन 30/04/19
सबसे अलग
निराला जगत में
मेरा प्रभु
कन्हैया।
माखनचोर
मटकी फोड़ता
चुराता राधा की
कढाई वाली
चुनरिया।
रचाये
रास लीला
सब गोपियों संग
बनता है
नचैया।
पार
लगाता है
भटकती नाव को
संसार से
खिवैया।
हरता
दुख बाधाएँ
भर देता झोली
मेरा कृष्ण!
हरैया।
डॉ. आशु जैन 30/04/19
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