Thursday, November 1, 2018

मेल

मेल:
क्यों चलूँ मैं तुम्हारे साथ?
जब हम दोनों का
कोई *मेल* ही नहीं है
मैं
गोरी राधिका
तुम
काले श्याम
मैं
ब्रज की शान
तुम
माखनचोर
नाम से ही बदनाम,
मैं
नाजुक कली
तुम
भटकते
गली गली
मैं
फूलों की जयमाल
तुम
गैया चराते ग्वाल
मैं
सीधी साधी नार
तुम
नटखट
नंदलाल।
लेकिन
कुछ है
जो हमदोनों में
समान है
हम दो तन
एक प्राण हैं
हम दो बंसी
एक तान हैं
हम दो सितारे
एक आसमान हैं
कौन कहता है
हम बेमेल हैं
हम तो सृष्टि का
सर्वोत्तम मेल हैं।।।
डॉ. आशु जैन 31/10/18

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