Thursday, October 4, 2018

बेटी


अधूरी ख्वाहिश पर
अंधेरे कोने में
चुपके से आंसू
बहा लेती है
बेटी है, सारे रिश्ते निभा लेती है
औरों की गलती पर
चुपचाप हाथ जोड़कर
खुद सबको मना लेती है
बेटी है, सारे रिश्ते निभा लेती है
दिल में हो कितना भी गम
चेहरे पे न दिखे शिकन
होंठो पे झूठी मुस्कान सजा लेती है
बेटी है, सारे रिश्ते निभा लेती है
इच्छाएं रह जाये अधूरी
प्यार की कमी भी न हो पूरी
फिर भी सबपे प्यार लुटा देती है
बेटी है, सारे रिश्ते निभा लेती है
डॉ आशु जैन 1/10/18

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