उड़ने दो आज मुझे पंख तो फैलाने दो
आजादी का कोई नया गीत मुझे गाने दो
आज पंखों में मुझे परवाज़ तो लगाने दो
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
सदियों से जकड़ी हुई बेड़ियाँ हटाने दो
छुपे हुए अरमान आज खुल के बताने दो
अरसा हुआ मुस्कुराये आज मुस्कुराने दो
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
आसमान तक मुझे उड़ के आज जाने दो
धरती की तरह अपना आँचल लहराने दो
पुरवा के संग मस्त होके बह जाने दो
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
नदियों की कलकल से सरगम बनाने दो
पतझड़ के पत्तों से साज नए बजाने दो
झरने के संग जरा निर्झर हो जाने दो
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
हंसने दो और अब न आँसू बहाने दो
तकलीफें आज मुझे सारी भूल जाने दो
खुद के नशे में मुझे खुद ही झूम जाने दो
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
बंद आँखों से मुझे स्वप्न तो सजाने दो
खुली आँखों से उन्हें पूरे कर जाने दो
अपनी आजादी का मुझे जश्न तो मनाने दो
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
कसम है न रोको मुझे आज मुझे जाने दो।
डॉ आशु जैन 03/10/2018
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