Tuesday, October 23, 2018

साथ साथ


जिस तरह दिन के साथ होती है रात
तुम भी चलो न वैसे ही मेरे *साथ साथ*
जैसे होती है बादल संग बरसात
वैसे ही तुम रहो न हरदम मेरे पास
जैसे धरती का प्यार पाता है आकाश
वैसे ही मुझे भी दो न अपने प्यार का आवास,
जैसे तारों को मिलता है चाँद का प्रकाश,
वैसे ही जीवन में मेरे भर दो नूर और विश्वास,
जैसे नदियों को होती है सागर की तलाश,
वैसे ही मुझे भी है तेरे प्यार की आस।
जैसे दिल की गहराइयों में छिपे हैं कितने राज,
वैसे ही अपने दिल में छुपा लो न मुझे आज।
डॉ. आशु जैन 21/10/18

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