न जाने क्यों आज बहुत याद आ रहा है,
जो दिल के करीब था दूर जा रहा है।
मोहब्बत है कभी प्यार कभी तकरार जायज़ है,
झगड़ के मुझसे वो मन ही मन मुस्कुरा रहा है।
दिलों के मसले बातों से हल नहीं होते,
आँखों ही आँखों से वो मुझे समझा रहा है।
रूठने का हक़ तो दिया ही नहीं उसे मैंने,
मेरी ही गलती है और वो मना रहा है।
इश्क़ में कैसी दूरियां कैसे फ़ासले,
दूर होके वो फिर दिल के करीब आ रहा है।
डॉ आशु जैन 'अश्क'
जो दिल के करीब था दूर जा रहा है।
मोहब्बत है कभी प्यार कभी तकरार जायज़ है,
झगड़ के मुझसे वो मन ही मन मुस्कुरा रहा है।
दिलों के मसले बातों से हल नहीं होते,
आँखों ही आँखों से वो मुझे समझा रहा है।
रूठने का हक़ तो दिया ही नहीं उसे मैंने,
मेरी ही गलती है और वो मना रहा है।
इश्क़ में कैसी दूरियां कैसे फ़ासले,
दूर होके वो फिर दिल के करीब आ रहा है।
डॉ आशु जैन 'अश्क'
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