Wednesday, September 19, 2018

क्षमा दान

*क्षमा* दान है महादान,
है सचमुच ये पुण्य का काम,
लेकिन क्षमा करूँ कैसे, अपने दर्द कहूँ कैसे।
माफ़ी वीरों की शान है,
जो माफ़ करे वो महान है,
मैं वो वीर बनूँ कैसे,
सबको माफ़ करूँ कैसे।
जिनने मुझको तड़पाया है,
आंसू दिए , रुलाया है,
मैं अब धीर धरूँ कैसे
सबको माफ़ करूँ कैसे।
गैर नहीं वो अपने हैं,
काली रातों के सपने हैं,
दिल की पीर हरु कैसे
सबको माफ़ करूँ कैसे।
वो जख्म बड़े ही गहरे हैं
जिन पर यादों के पहरे है,
मैं वो जख्म भरूँ कैसे
और सबको माफ़ करूँ कैसे।
काया तो पहले भेद गए
वो अंतर्मन तक छेद गए
मन के वो घाव भरूँ कैसे और सबको माफ़ करूँ कैसे।
देखूँ खुदको घिन आती है
उनकी सूरत दिख जाती है
शीशे में अक्स  धरूँ कैसे
मैं सबको माफ़ करूँ कैसे।
मैं सबको.......

डॉ आशु जैन

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