मेरे जीवन में तुम्हारे सिवा कुछ भी नही
तुम्हारा जीवन मेरे बिना भी हसीन क्यों है
तुमने ही तो आगे बढ़कर हाथ थामा था मेरा
फिर मेरे बिना भी तुम्हारी महफ़िल रंगीन क्यों है
इश्क तुमने भी किया मैने भी किया
फिर मेरे ही प्यार की ये तौहीन क्यों है
चले तो दोनों थे आसमान छूने के लिए
फिर मेरे हिस्से में बंजर जमीन क्यों है
दिल टूटा है मेरा तो चोट तुम्हे भी लगी होगी
फिर मेरे ही दिल का माहौल गमगीन क्यों है
आंखों से आंसू तो तुम्हारे भी बहे ए 'अश्क'
लेकिन मेरी आंखो का पानी नमकीन क्यों है
डॉ आशु जैन
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