जीवन की उन राहो पर
जब चलते चलते थक जाओ
जब हंसकर मिलते थक जाओ
जब रोते रोते थक जाओ
याद हमें तुम कर लेना
कुछ आँसू कम हो जायेंगे
जब चारों ओर अंधेरा हो
तुमको एकांत ने घेरा हो
जब आस किरन न दिखती हो
जब रोशनी आंखों में चुभती हो
तुम आँखे बंद कर लेना
हम तुमको मिल जायेंगे
कुछ आँसू कम हो जायेंगे
जब सारे तुमसे रूठे हों
सब रिश्ते नाते टूटे हों
जब सारे सच्चे झूठे हों
आंखों से झरने फूटे हों
याद हमे तुम कर लेना
कुछ आंसू कम हो जाएंगे
जब दिल की गलियां सूनी हो
निराशाओं की धूनी हो
अँखियाँ भी सूनी सूनी हो
याद हमें तुम कर लेना
कुछ आँसू कम हो जाएंगे
जब अंधियारा चहुँ ओर मिले
कहीं न कोई फूल खिले
जीवन पथ की बाधाओं में
पैरो में चुभते शूल मिले
तुम एक बार बस कह देना
हम तुमको मिल जायेंगे
कुछ आंसू कम हो जायेगे.....
डॉ आशु जैन 'अश्क'
जब चलते चलते थक जाओ
जब हंसकर मिलते थक जाओ
जब रोते रोते थक जाओ
याद हमें तुम कर लेना
कुछ आँसू कम हो जायेंगे
जब चारों ओर अंधेरा हो
तुमको एकांत ने घेरा हो
जब आस किरन न दिखती हो
जब रोशनी आंखों में चुभती हो
तुम आँखे बंद कर लेना
हम तुमको मिल जायेंगे
कुछ आँसू कम हो जायेंगे
जब सारे तुमसे रूठे हों
सब रिश्ते नाते टूटे हों
जब सारे सच्चे झूठे हों
आंखों से झरने फूटे हों
याद हमे तुम कर लेना
कुछ आंसू कम हो जाएंगे
जब दिल की गलियां सूनी हो
निराशाओं की धूनी हो
अँखियाँ भी सूनी सूनी हो
याद हमें तुम कर लेना
कुछ आँसू कम हो जाएंगे
जब अंधियारा चहुँ ओर मिले
कहीं न कोई फूल खिले
जीवन पथ की बाधाओं में
पैरो में चुभते शूल मिले
तुम एक बार बस कह देना
हम तुमको मिल जायेंगे
कुछ आंसू कम हो जायेगे.....
डॉ आशु जैन 'अश्क'
Very well written... awesome work..������
ReplyDeleteThnku
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