Tuesday, September 18, 2018

विसर्जन

गुस्से में रिया ने सारा दिन खाना नहीं खाया, रितिक भी उसे मनाये बिना भारी मन से ऑफिस चला गया। इधर रिया सारा दिन घर में घुटती रही , मन ही मन कभी रितिक को कभी खुद को कोसती रही। कभी सोचती क्या चला जाता अगर रितिक खुद उससे बात करने की पहल कर लेता फिर कभी सोचती कि मेरी ही गलती थी मुझे सासु माँ से ऊंची आवाज में बात नही करनी चाहिए थी और अगर कर भी ली तो माफी मांग के सारी बात को ठीक कर सकती थी, इसी उहापोह में सारा दिन निकल गया। वैसे तो रितिक दिन में 2-3 बार फ़ोन करके हालचाल पूछ लेते थे लेकिन आज एक भी फ़ोन नहीं आया। इधर रिया की बेचैनी और गुस्सा बढ़ता ही जा रहा था वह खुद के ही सवालो जवाबों की मझधार में खुद को उलझा हुआ महसूस कर रही थी। इतने में दरवाजे की घंटी ने उसकी तंद्रा भंग की उसने दरवाजा खोला रितिक सामने खड़े थे लेकिन कुछ बोले नही चुपचाप जाके सोफे पे बैठ गए। रिया के मन की उधेड़बुन अब धीरे धीरे अपराधबोध में बदल रही थी लेकिन वह अब भी गुस्सा थी क्योंकि उसने सारा दिन कुछ नही खाया और रितिक ने एक बार भी उससे नही पूछा। रात के खाने के समय वह सबको परोसने के बाद चुपचाप अपने कमरे में चली गई इतने में रितिक भोजन की थाल लिए रिया के पास जाकर बैठ गए और कहा तुमने आज सारा दिन खाना क्यों नही खाया? इतना सुनते ही रिया फूट फूट कर लिपट कर रोने लगी। उसका गुस्सा, अपराधबोध, अबोलापन सब उसके आंसुओं के साथ विसर्जित हो गया।। 

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